नाग पंचमी प्रमाणिक शास्त्रीय और पौराणिक संदर्भ सहित कथा व महत्व ✍️



🐍 नाग पंचमी: प्रमाणिक शास्त्रीय और पौराणिक संदर्भ सहित कथा व महत्त्व

🪔 1. महाभारत में नागों का उल्लेख:

महाभारत के "आस्तीक पर्व" में नागवंश की उत्पत्ति और उनके सर्वनाश की योजना का वर्णन आता है। राजा जनमेजय, जिनके पिता परीक्षित को तक्षक नाग ने डंसा था, उन्होंने सर्पसत्र यज्ञ आरंभ किया, जिसमें सभी नाग जलकर भस्म हो रहे थे। उस समय आस्तीक मुनि ने यज्ञ को रोककर नागवंश का रक्षण किया।

📖 स्रोत: महाभारत, आदिपर्व, आस्तीक पर्व, अध्याय 35-45

> “सर्पा ये वासुकिप्रभृतयो ये चान्ये दिवौकसः।
ते सर्वे हव्यकवचाः क्रतौ ते समुपस्थिताः॥”



इस कथा से यह स्पष्ट होता है कि नागों की पूजा और रक्षा की भावना वैदिक परंपरा से जुड़ी है।

📜 2. गरुड़ पुराण:

गरुड़ पुराण, जो मृत्यु और पाप-पुण्य के विषयों में प्रमुख माना गया है, उसमें नागों का विशेष रूप से उल्लेख है:

> "सर्पाणां पूजनं कुर्यात् श्रावणे शुक्लपञ्चमीम्।
विशेषात् सर्वसिद्ध्यर्थं दुर्वाशतकपूरितम्॥"
📖 गरुड़पुराण, प्रेतखण्ड



भावार्थ: श्रावण शुक्ल पंचमी को नागों की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

🐍 3. भागवत पुराण:

श्रीमद्भागवत महापुराण (स्कंध 10, अध्याय 16) में श्रीकृष्ण द्वारा कालिय नाग को यमुना से निकालने की कथा प्रसिद्ध है। कृष्ण ने कालिय को दंडित कर यमुना की रक्षा की और फिर उसे क्षमा कर समुद्र में जाने को कहा।

यह घटना भी श्रावण मास में घटित मानी जाती है, और नाग पंचमी के दिन कालिय मर्दन लीला का स्मरण किया जाता है।


🐍 4. स्कंद पुराण – नागों की पूजा विधि:

> "नागानां पूजनं कुर्याद् द्विजातीनां च भोजनम्।
श्रावण्यां पंचम्यां तु सर्पदोषविनाशनम्॥"
📖 स्कन्दपुराण, नागवतार खण्ड



भावार्थ: श्रावण पंचमी को नागों की पूजा और ब्राह्मणों को भोजन कराने से सर्पदोष दूर होता है।


-🐍 5. ब्रह्मवैवर्त पुराण में कथा:

इस पुराण में विस्तार से एक कथा आती है, जिसमें हल चलाने पर नागों के बच्चों की मृत्यु होती है, और नागिन क्रोध में आकर संहार करती है। परंतु धर्मात्मा छोटे पुत्र की भक्ति व नम्रता से प्रसन्न होकर सभी को जीवनदान देती है।

📖 ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृतिखण्ड, नागपंचमी व्रत कथा

🐍 6. नागों के प्रमुख नाम — शास्त्रीय प्रमाण सहित:

> "अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मं हलाहलं तथा।
तक्षकं कर्कोटकं च शंखपिंडं च चाप्यथ॥
धृतराष्ट्रं च कालियं एतान्नागान् नमाम्यहम्॥"
📖 महाभारत, आदिपर्व

इन नागों को पंचमी तिथि पर पूजा करने से भय, रोग, दोष, अकाल मृत्यु से रक्षा होती है।

नाग पंचमी केवल पौराणिक विश्वास नहीं है, यह महाभारत, पुराणों और धर्मशास्त्रों से अनुमोदित पर्व है।

इसका मूल भाव प्रकृति-जीवों के प्रति श्रद्धा, सर्पदोष निवारण, और अहिंसा का अभ्यास है।

यह पर्व सह-अस्तित्व, पर्यावरण संतुलन, और धार्मिक कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है।

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