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श्री हरी स्तोत्रम्

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।। श्रीहरि स्तोत्रम् ।।           जगज्जालपालं चलत्कण्ठमालं                     शरच्चन्द्रभालं महादैत्यकालं।           नभोनीलकायं दुरावारमायं                     सुपद्मासहायम् भजेऽहं भजेऽहं।।          सदाम्भोधिवासं गलत्पुष्पहासं                     जगत्सन्त्रिवासं शतादित्यभासं।           गदाचक्रशस्त्रं लसत्पीतवस्त्रं                      हसच्चारुवक्त्रं भजेऽहं भजेऽहं।।          रमाकण्ठहारं श्रुतिव्रातसारं                      जलान्तर्विहारं धराभारहारं।          चिदानन्दरूपं मनोज्ञस्वरूपं                       ध्रुत...

“भाई दूज पर चित्रगुप्त आराधना – कर्म, धर्म और न्याय की साधना”

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🌸 चित्रगुप्त पूजा – न्याय, लेखा और कर्म की आराधना (भाई दूज / यम द्वितीया विशेष) 🔶 भूमिका दीपावली के पावन पर्व के दो दिन बाद आने वाली भाई दूज (यम द्वितीया) का दिन केवल भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक ही नहीं, बल्कि धर्म और न्याय के देवता चित्रगुप्त जी की आराधना का दिन भी है। इस दिन विशेषकर कायस्थ समाज अपने कुलदेवता चित्रगुप्त जी की पूजा करता है, परंतु इसका आध्यात्मिक संदेश सभी के लिए समान है — अपने कर्मों की समीक्षा करना और सत्य के लेखे में खरे उतरना। 🔶 चित्रगुप्त जी का परिचय चित्रगुप्त जी ब्रह्मा जी की काया से उत्पन्न हुए — इसलिए उनका नाम पड़ा “कायस्थ”। “चित्र” का अर्थ है स्पष्ट और बोधगम्य, और “गुप्त” का अर्थ है गुप्त रूप से जानने वाला। इस प्रकार चित्रगुप्त वह दिव्य शक्ति हैं जो प्रत्येक जीव के कर्मों का सूक्ष्म लेखा-जोखा रखती है। यमराज जब किसी आत्मा का निर्णय करते हैं, तो चित्रगुप्त जी के लेखे के आधार पर ही न्याय होता है। 🔶 चित्रगुप्त पूजा का महत्व यह दिन हमें स्मरण कराता है कि— > “कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाते, हर कार्य का फल निश्चित है।” चित्रगुप्त जी की पूजा का अर्थ है — ...

🪔"पाँच दिनों का दीप उत्सव : दीपावली के प्रत्येक दिवस का आध्यात्मिक अर्थ"✍️

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🌺 दीपोत्सव के पाँच दिन : धनतेरस से भाई दूज तक की परंपरा और पूजा-विधि 🌺 भारत की संस्कृति में दीप केवल प्रकाश का प्रतीक नहीं, बल्कि अंधकार पर ज्ञान की विजय का स्मरण है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी से लेकर शुक्ल पक्ष की द्वितीया तक पाँच दिनों का यह दीपोत्सव जीवन में स्वास्थ्य, समृद्धि, धर्म और प्रेम के मूल्यों को जगाने वाला पर्व है। इन पाँच दिनों में — धनतेरस, रूप चौदस, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज — प्रत्येक का अपना महत्व और संदेश है। 🔶 1. धनतेरस (धन्वंतरि जयंती) कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन धनतेरस मनाई जाती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्होंने ही आयुर्वेद का प्राकट्य किया था, इसलिए यह दिन स्वास्थ्य और दीर्घायु का प्रतीक है। परंपरा व पूजन-विधि : इस दिन घर में टूटे-फूटे पुराने बर्तन निकालकर नए बर्तन, विशेषकर चाँदी के बर्तन खरीदने की परंपरा है। इन बर्तनों में भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की मूर्तियाँ रखकर पूजन किया जाता है। पूजन के समय यह मंत्र बोला जाता है — “यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये। धनधान्यसम...

🌺श्री राम रक्षा स्तोत्र 🌺

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🌺राम रक्षा स्तोत्र🌺 विनियोग: अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः। श्री सीतारामचंद्रो देवता। अनुष्टुप छंदः। सीता शक्तिः। श्रीमान हनुमान कीलकम। श्री सीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्तोत्रजपे विनियोगः। 🌺🌺अथ ध्यानम्‌:🌺🌺 ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्‌। वामांकारूढसीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं नानालंकार दीप्तं दधतमुरुजटामंडलं रामचंद्रम। . 🌺🌺राम रक्षा स्तोत्र:🌺🌺 चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम्। एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्।। ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम्। जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितं।। सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम्। स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम्।। . रामरक्षां पठेत प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम्। शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः।। कौसल्येयो दृशो पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुति। घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः।। जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः। स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः।। . करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित। मध्यं पातु खरध्वंस...

🌺श्रीकालभैरवपञ्चरत्नस्तुतिः🌺

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॥ श्रीकालभैरवपञ्चरत्नस्तुतिः ॥ खड्गं कपालं डमरुं त्रिशूलं हस्ताम्बुजे सन्दधतं त्रिनेत्रम् । दिगम्बरं भस्मविभूषिताङ्गं नमाम्यहं भैरवमिन्दुचूडम् ॥ १॥ कवित्वदं सत्वरमेव मोदान्नतालये शम्भुमनोऽभिरामम् । नमामि यानीकृतसारमेयं भवाब्धिपारं गमयन्तमाशु ॥ २॥ जरादिदुःखौघविभेददक्षं विरागिसंसेव्यपदारविन्दम् । नराधिपत्वप्रदमाशु नन्त्रे सुराधिपं भैरवमानतोऽस्मि ॥ ३॥ शमादिसम्पत्प्रदमानतेभ्यो रमाधवाद्यर्चितपादपद्मम् । समाधिनिष्ठैस्तरसाधिगम्यं नमाम्यहं भैरवमादिनाथम् ॥ ४॥ गिरामगम्यं मनसोऽपि दूरं चराचरस्य प्रभवादिहेतुम् । कराक्षिपच्छून्यमथापि रम्यं परावरं भैरवमानतोऽस्मि ॥ ५॥ इति श‍ृङ्गेरि श्रीजगद्गुरु श्रीसच्चिदानन्दशिवाभिनवनृसिंह- भारतीस्वामिभिः विरचिता श्रीकालभैरवपञ्चरत्नस्तुतिः।

🌺 अथ् श्री सूक्त मंत्र पाठ🌺

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।। अथ श्री-सूक्त मंत्र पाठ ।।  1- ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं, सुवर्णरजतस्त्रजाम् । चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं, जातवेदो म आ वह ।। 2- तां म आ वह जातवेदो, लक्ष्मीमनपगामिनीम् । यस्यां हिरण्यं विन्देयं, गामश्वं पुरूषानहम् ।। 3- अश्वपूर्वां रथमध्यां, हस्तिनादप्रमोदिनीम् । श्रियं देवीमुप ह्वये, श्रीर्मा देवी जुषताम् ।। 4- कां सोस्मितां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम् । पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोप ह्वये श्रियम् ।। 5- चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम् । तां पद्मिनीमीं शरणं प्र पद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ।।   6- आदित्यवर्णे तपसोऽधि जातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽक्ष बिल्वः । तस्य फलानि तपसा नुदन्तु या अन्तरा याश्च बाह्या अलक्ष्मीः ।। 7- उपैतु मां दैवसखः, कीर्तिश्च मणिना सह । प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेऽस्मिन्, कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ।। 8- क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठामलक्ष्मीं नाशयाम्यहम् । अभूतिमसमृद्धिं च, सर्वां निर्णुद मे गृहात् ।। 9- गन्धद्वारां दुराधर्षां, नित्यपुष्टां करीषिणीम् । ईश्वरीं सर्वभूतानां, तामिहोप ह्वये श्रि...

🌺अहोई अष्टमी व्रत एवं उद्यापन 🌺

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🌺 अहोई अष्टमी व्रत एवं उद्यापन विधि कार्तिक कृष्ण अष्टमी — दीपावली से लगभग एक सप्ताह पूर्व। इस दिन माताएँ अपनी संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए उपवास रखती हैं। 🕉️ संकल्प मंत्र स्नान कर पूजन-स्थान पर कलश स्थापित करें और दाहिने हाथ में जल, अक्षत, फूल लेकर संकल्प करें — > मंत्र: मम पुत्र-पौत्रादि-सहित कुल की रक्षा-सुख-समृद्धि-द्वारा चिरायु-सिद्धये अहोई अष्टमी-व्रतं अहं करिष्ये। अहोई माता-सप्तऋषि-सहित पूजनं च उद्यापनं च करिष्ये। 🌿 पूजन सामग्री अहोई माता एवं स्याह (नेवला) का चित्र चांदी की अहोई माता (उद्यापन हेतु) कलश, चावल, दूध, बताशे, रोली, मौली, अक्षत दीपक, जल पात्र, धूप सात प्रकार के अनाज (सप्तधान्य) वस्त्र, दक्षिणा, मिठाई, फल सात या बारह सुहागिन स्त्रियाँ 🌼 पूजा-विधि 1. सायंकाल तारा उदय से पूर्व पूजन प्रारंभ करें। 2. अहोई माता और स्याह (नेवला) का चित्र बनाकर या टाँगकर दीपक जलाएँ। 3. माता की कथा सुनें या स्वयं पढ़ें। 4. जल से अर्घ्य देकर तारा और अहोई माता को प्रणाम करें। 5. सन्तान की कुशलता, आयु और सुख के लिए प्रार्थना करें। 📜 अहोई माता की कथा एक बार किसी नगर ...