🌸 अष्टविनायक यात्रा: कथा, भक्ति और महिमा 🌸 परिचय महाराष्ट्र में आठ स्वयंभू गणेशजी इतने प्रसिद्ध हैं कि उन्हें एक साथ अष्टविनायक कहा जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त इन आठ गणेशजी की परिक्रमा करता है, उसके जीवन से सभी विघ्न दूर होते हैं और उसे बुद्धि, सिद्धि और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस यात्रा की शुरुआत और समापन मोरेश्वर (मोरेगांव) से होती है। आइए जानते हैं क्रमवार आठों गणेशजी की विस्तृत कथाएँ, स्थान और महिमा— 1️⃣ मोरेश्वर गणपति (मोरेगांव, पुणे) बहुत समय पहले, सिंधुरासुर नामक दैत्य ने पृथ्वी पर अराजकता फैला दी थी। वह न केवल देवताओं के लिए, बल्कि साधारण मनुष्यों के लिए भी संकट बन गया था। लोग, राजा और ऋषि सब उसकी क्रूरता से पीड़ित थे। देवताओं ने ब्रह्माजी से प्रार्थना की कि इस संकट का नाश कौन करेगा। ब्रह्मा ने गणेशजी की ओर इशारा किया। गणेशजी मोर पर सवार होकर युद्धभूमि में आए। उनका तेजस्वी रूप देखकर दैत्य डर गया, पर उसने हार नहीं मानी। गणेशजी ने अपनी बुद्धि और दिव्य शक्ति से दैत्य का संहार किया। तब से मोरेश्वर की कृपा से सभी भक्त विघ्नों से मुक्त ...
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