🌺 महालक्ष्मी व्रत एवं हाथी पूजा 🌺 भूमिका भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से लेकर आश्विन कृष्ण अष्टमी तक १६ दिनों तक चलने वाला महालक्ष्मी व्रत विशेषकर उत्तर भारत और महाराष्ट्र में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। इस व्रत को हाथी पूजा भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का हाथी पर विराजमान स्वरूप पूजित होता है। लोक विश्वास है कि इस व्रत के प्रभाव से दरिद्रता दूर होती है, सौभाग्य की वृद्धि होती है और घर-आँगन में स्थायी लक्ष्मी का वास होता है। 🌺महत्त्व यह व्रत विशेषकर विवाहित स्त्रियाँ करती हैं, जिससे पति की दीर्घायु, परिवार की समृद्धि और अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है। ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य स्त्रियाँ इसे प्रमुखता से करती हैं, परंतु इच्छुक कोई भी कर सकता है। १६ दिनों तक माता लक्ष्मी के विभिन्न रूपों का पूजन कर अन्न-धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। पूजन विधि आवश्यक सामग्री गणेशजी की मूर्ति, महालक्ष्मीजी का चित्र या प्रतिमा, हाथी के प्रतीक (मिट्टी/धातु/चित्र), कलश, वस्त्र, पुष्पमाला, फल, पंचामृत, रोली, चावल, हल्दी, दूर्वा, कपूर, दीपक, धूप, मिठाई, रेशमी कपड़े, न...
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