त्रिदोष: वात, पित्त, कफ - कारण, लक्षण, समाधान✍️
त्रिदोष: वात, पित्त, कफ - कारण, लक्षण, समाधान
आयुर्वेद कहता है:
"सर्वे रोगा: त्रिदोष मूलका:" — शरीर के सभी रोग वात, पित्त और कफ के असंतुलन से होते हैं। यदि त्रिदोष संतुलित हैं तो व्यक्ति स्वस्थ रहता है।
1. वात दोष (Vata - वायु तत्व)
मुख्य लक्षण:
गैस, पेट, कमर, घुटनों, सिर, सीने में दर्द
डकार, चक्कर, घबराहट, हिचकी
जोड़ घिसना, हड्डियों में आवाज, स्लिप डिस्क, सर्वाइकल
कारण:
अधिक प्रोटीन, दालें, मैदा, बेसन, दूध व दुग्ध उत्पाद
आंतों की कमजोरी, व्यायाम की कमी
यूरिक एसिड जमा होना
निवारण:
अदरक, सोंठ, लहसुन, मेथीदाना का सेवन
गर्म-ठंडी सिकाई: अंग यदि ठंडा हो तो गर्म, गर्म हो तो ठंडी सिकाई करें
व्यायाम व योग करें
2. कफ दोष (Kapha - जल तत्व)
मुख्य लक्षण:
बलगम, खांसी, जुकाम, अस्थमा, निमोनिया, सांस में तकलीफ
शरीर में भारीपन, आलस्य
कारण:
ठंडी चीजें, दूध-दुग्ध पदार्थ, तली चीजें, धूल-धुआं
धूप न लेना, ठंडा पानी
निवारण:
विटामिन C युक्त पदार्थ (आंवला)
लहसुन, अदरक का सेवन
गरारे, गुनगुने पानी में पैर डालना
नियमित धूप स्नान 30-60 मिनट
3. पित्त दोष (Pitta - अग्नि तत्व)
मुख्य लक्षण:
पेट में जलन, खट्टी डकार, भारीपन
शरीर में जलन, पेशाब में जलन
बीपी, शुगर, मोटापा, तनाव, क्रोध
कारण:
तीखे मसाले, लाल मिर्च, तंबाकू, शराब, मांसाहार
बार-बार पका भोजन
गुस्सा, चिंता, दवाइयां
वेग (पेशाब, पाद, छींक) रोकना
निवारण:
फटे दूध का पानी (नींबू डालकर दूध फाड़ें, पानी छानकर पिएं)
नींबू पानी, फल व सब्जियों का रस (अनार, लौकी, पत्ता गोभी)
रीढ़ की हड्डी व पेट पर गीला कपड़ा रखकर ठंडक दें
गहरी नींद, योग व ध्यान
आंतों की सफाई:
बड़ी आंत में कचरा हो तो रोग निश्चित है।
एनीमा (बस्ती क्रिया): आयुर्वेद में आंतों की सफाई के लिए श्रेष्ठ।
त्रिफला चूर्ण रात को गर्म पानी से लें।
✅ अतिरिक्त सुझाव:
हर मौसम में ऋतुचर्या का पालन करें।
भोजन सात्त्विक, ताजा व सुपाच्य हो।
प्रातः सूर्य की किरणें लें।
शरीर में यदि कोई अंग गर्म है तो ठंडी पट्टी, ठंडा है तो गर्म सिकाई करें।
आयुर्वेद कहता है:
"सर्वे रोगा: त्रिदोष मूलका:" — शरीर के सभी रोग वात, पित्त और कफ के असंतुलन से होते हैं। यदि त्रिदोष संतुलित हैं तो व्यक्ति स्वस्थ रहता है।
1. वात दोष (Vata - वायु तत्व)
मुख्य लक्षण:
गैस, पेट, कमर, घुटनों, सिर, सीने में दर्द
डकार, चक्कर, घबराहट, हिचकी
जोड़ घिसना, हड्डियों में आवाज, स्लिप डिस्क, सर्वाइकल
कारण:
अधिक प्रोटीन, दालें, मैदा, बेसन, दूध व दुग्ध उत्पाद
आंतों की कमजोरी, व्यायाम की कमी
यूरिक एसिड जमा होना
निवारण:
अदरक, सोंठ, लहसुन, मेथीदाना का सेवन
गर्म-ठंडी सिकाई: अंग यदि ठंडा हो तो गर्म, गर्म हो तो ठंडी सिकाई करें
व्यायाम व योग करें
2. कफ दोष (Kapha - जल तत्व)
मुख्य लक्षण:
बलगम, खांसी, जुकाम, अस्थमा, निमोनिया, सांस में तकलीफ
शरीर में भारीपन, आलस्य
कारण:
ठंडी चीजें, दूध-दुग्ध पदार्थ, तली चीजें, धूल-धुआं
धूप न लेना, ठंडा पानी
निवारण:
विटामिन C युक्त पदार्थ (आंवला)
लहसुन, अदरक का सेवन
गरारे, गुनगुने पानी में पैर डालना
नियमित धूप स्नान 30-60 मिनट
3. पित्त दोष (Pitta - अग्नि तत्व)
मुख्य लक्षण:
पेट में जलन, खट्टी डकार, भारीपन
शरीर में जलन, पेशाब में जलन
बीपी, शुगर, मोटापा, तनाव, क्रोध
कारण:
तीखे मसाले, लाल मिर्च, तंबाकू, शराब, मांसाहार
बार-बार पका भोजन
गुस्सा, चिंता, दवाइयां
वेग (पेशाब, पाद, छींक) रोकना
निवारण:
फटे दूध का पानी (नींबू डालकर दूध फाड़ें, पानी छानकर पिएं)
नींबू पानी, फल व सब्जियों का रस (अनार, लौकी, पत्ता गोभी)
रीढ़ की हड्डी व पेट पर गीला कपड़ा रखकर ठंडक दें
गहरी नींद, योग व ध्यान
आंतों की सफाई:
बड़ी आंत में कचरा हो तो रोग निश्चित है।
एनीमा (बस्ती क्रिया): आयुर्वेद में आंतों की सफाई के लिए श्रेष्ठ।
त्रिफला चूर्ण रात को गर्म पानी से लें।
✅ अतिरिक्त सुझाव:
हर मौसम में ऋतुचर्या का पालन करें।
भोजन सात्त्विक, ताजा व सुपाच्य हो।
प्रातः सूर्य की किरणें लें।
शरीर में यदि कोई अंग गर्म है तो ठंडी पट्टी, ठंडा है तो गर्म सिकाई करें।
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