महामृत्युंजय मंत्र
🔱 महामृत्युंजय मंत्र:
> ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥
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🔷 मन्त्र का शाब्दिक अर्थ:
> त्र्यम्बकं – तीन नेत्रों वाले (भगवान रुद्र),
यजामहे – हम पूजन करते हैं,
सुगन्धिं – जो शुभ गन्ध वाले हैं (आध्यात्मिक सुगन्ध),
पुष्टिवर्धनम् – पोषण करने वाले हैं,
उर्वारुकमिव – जैसे खरबूजा डंठल से अलग हो जाता है,
बन्धनान् – बंधनों (मृत्यु, रोग आदि) से,
मृत्योः मुक्षीय – हमें मृत्यु से मुक्ति दो,
मा अमृतात् – परंतु अमरत्व (मोक्ष) से न वंचित करो।
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🔶 महामृत्युंजय मंत्र जाप के लाभ:
1. असाध्य रोगों में चमत्कारी लाभ
2. अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति
3. मानसिक, शारीरिक और आत्मिक शुद्धि
4. ग्रहबाधा, पितृदोष, मारण-ऊपरी बाधा से रक्षा
5. दीर्घायु और आरोग्यता की प्राप्ति
6. मृत्यु जैसे संकट से रक्षा (यात्रा, ऑपरेशन, जीवन संघर्ष में)
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🔱 जप की विधि: (साधना रूप में)
अनुक्रम विवरण
1. समय ब्रह्ममुहूर्त (सुबह 4:00 से 6:00) सर्वश्रेष्ठ
2. आसन कुशासन, कम्बल या ऊनी वस्त्र का आसन
3. स्थान पवित्र शांत स्थान, ईशान कोण उत्तम
4. संख्या न्यूनतम 108 जाप प्रतिदिन (एक माला) या 1008 (सिद्धि हेतु)
5. सामग्री रुद्राक्ष माला, जल, कुश, दीपक, धूप
6. आचरण संयमित आहार, ब्रह्मचर्य, मौन या मितभाषिता
7. दिशा पूर्व या उत्तर मुख होकर जप करें
8. भाव मृत्यु, रोग, क्लेश से मुक्ति की प्रार्थना भावनात्मक रूप से करें
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🔯 महामृत्युंजय मंत्र सिद्ध प्रयोग:
1. रोग शमन हेतु जल प्रयोग:
108 बार मंत्र जप कर जल पर अभिमंत्रण करें।
रोगी को वह जल पिलाएं, या उस जल से स्नान कराएं।
2. दीर्घकालिक रोग में विशेष प्रयोग:
प्रतिदिन 1 माला जप।
एक लोटे में जल, तुलसी पत्ता, बिल्वपत्र, रुद्राक्ष डालकर उस पर जप करें।
रोगी को वह जल पिलाएं।
3. मरणासन्न व्यक्ति के लिए:
घर में कोई व्यक्ति गंभीर अवस्था में हो, तो 5,000 / 11,000 / 1,25,000 जाप करें।
नैवेद्य, दीप, घी, धूप से पूजा सहित करें।
परिवारजन भी सामूहिक जाप करें।
4. रात्रि में ऊपरी बाधा / भय / मृत्यु के संकेत हों:
रात्रि 9 बजे से 12 बजे तक दीप जलाकर जाप करें।
काले तिल, गौघृत, लोहबान का धूप करें।
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🕉️ विशेष टिप्स:
मंत्र का उच्चारण शुद्ध और धीमे स्वर में करें।
जप के समय मन स्थिर और चंचल न हो।
पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ जप करें।
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📿 सिद्धि प्राप्ति हेतु मंत्र-साधना:
यदि आप इस मंत्र की मंत्र-सिद्धि करना चाहते हैं, तो निम्न विधि अपनाएं:
11 दिनों तक प्रतिदिन 11 माला जप करें।
पूर्ण नियम, ब्रह्मचर्य, मौन और सात्त्विकता आवश्यक है।
अंतिम दिन हवन करें – महामृत्युंजय मंत्र से 108 आहुतियाँ दें।
गाय को हरा चारा और ब्राह्मण को भोजन दें।
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✴️ जप की संख्या के अनुसार फल:
जप संख्या प्रभाव
108 रोग शमन हेतु
1008 क्लेश व भय निवारण हेतु
11,000 रोगमुक्ति व मानसिक शक्ति
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