मंगल ग्रह का प्रभाव : ज्योतिषीय दृष्टि से✍️

मंगल ग्रह का प्रभाव : ज्योतिषीय दृष्टि से

1. प्रस्तावना✍️

ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को शक्ति, पराक्रम और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। यह ग्रह मानव जीवन में साहस, बल, उत्साह और संघर्ष की भावना को जागृत करता है। सूर्य आत्मा है, चंद्रमा मन है और मंगल शरीर की शक्ति तथा कर्म का अधिपति है। इसे ग्रहों का सेनापति कहा गया है।


2. मंगल का शास्त्रीय महत्व

  • मंगल को भूमिपुत्र कहा गया है, क्योंकि यह पृथ्वी तत्व से जुड़ा है।
  • यह ग्रह रक्त, मांसपेशियाँ और जीवनशक्ति का नियंत्रक है।
  • पुराणों में मंगल को श्री शिव और भूमि देवी के पुत्र के रूप में वर्णित किया गया है।
  • यह ग्रह साहस, भूमि-संपत्ति और सैन्य बल का कारक है।

3. मंगल का भौतिक व ज्योतिषीय स्वरूप

  • मंगल एक अग्नि प्रधान ग्रह है, इसका रंग लाल है और यह ऊर्जा, जोश तथा गुस्से का प्रतीक है।
  • इसका प्रभाव व्यक्ति को परिश्रमी, तेजस्वी और निर्णायक बनाता है।
  • मंगल एक राशि में लगभग 45 दिन तक रहता है।
  • यह ग्रह मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी है, जबकि मकर में उच्च और कर्क में नीच का होता है।

4. मंगल के प्रभाव क्षेत्र

  • शरीर पर प्रभाव – रक्त, अस्थि-मज्जा, पित्त, मांसपेशियाँ और वीर्य पर इसका प्रभाव होता है।
  • मन पर प्रभाव – साहस, निर्णय क्षमता, प्रतियोगिता भावना, नेतृत्व और क्रोध मंगल से जुड़े हैं।
  • समाज व जीवन पर प्रभाव – भूमि, भवन, भाई-बहन, शौर्य, दुर्घटनाएँ, शस्त्र-बल और वैवाहिक जीवन मंगल से देखे जाते हैं।

5. मंगल की शुभ-अशुभ स्थिति

  • शुभ मंगल – साहसी, पराक्रमी, ऊर्जावान, नेतृत्व गुणों वाला, भूमि-संपत्ति प्राप्त करने वाला और सफल योद्धा बनाता है।
  • अशुभ मंगल – क्रोधी स्वभाव, हिंसक प्रवृत्ति, दुर्घटनाएँ, रक्त रोग, भाई-बहन से विवाद और वैवाहिक जीवन में कलह (मांगलिक दोष) लाता है।

6. मंगल और मांगलिक दोष

  • जब मंगल 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में स्थित होता है तो इसे मांगलिक दोष कहा जाता है।
  • यह वैवाहिक जीवन में तनाव, देरी या कलह का कारण बन सकता है।
  • परंतु योग्य ग्रह दृष्टि या शुभ ग्रहों की स्थिति इस दोष को कम कर सकती है।

7. मंगल की पूजा और उपाय

  • मंगलवार का व्रत और हनुमान जी की उपासना मंगल को शुभ फल देती है।
  • लाल मसूर, गुड़, लाल वस्त्र और ताम्रदान मंगल को प्रसन्न करते हैं।
  • मंगल मंत्रॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः – का जाप बल और विजय प्रदान करता है।

8. सारांश

मंगल जीवन का योद्धा है। यह हमें संघर्ष से लड़ने की शक्ति देता है। यदि सूर्य ऊर्जा है, चंद्रमा मन है, तो मंगल वह हिम्मत है जो हर कठिनाई के बीच रास्ता बनाती है। शुभ मंगल जीवन को उत्साह और विजय से भर देता है, जबकि अशुभ मंगल क्रोध और अशांति का कारण बनता है। इसीलिए इसे संतुलित करना अत्यंत आवश्यक है।



Comments

Popular posts from this blog

पार्थिव शिवलिंग, रुद्राभिषेक और अभिषेक सामग्री का पौराणिक और शास्त्रीय महत्व🌻

🌼 श्राद्ध महिमा : पितृ तर्पण का शास्त्रीय, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक आधार 🌼

🌼 भाद्रपद शुक्ल तृतीया: हरितालिका तीज व्रत का महत्व, कथा और विधि