. “ऊर्जा संतुलन की कुंजी – सात चक्र और सरल दैनिक अभ्यास”✍️
🌸 सात चक्र: ऊर्जा, चेतना और संतुलन की यात्रा
भारतीय योग और तंत्र परंपरा में मनुष्य को केवल हड्डी-मांस का ढांचा नहीं, बल्कि चेतना का अद्भुत केंद्र माना गया है। इस चेतना को प्रवाहित करने वाले सात मुख्य ऊर्जा केंद्र (चक्र) बताए गए हैं। ये चक्र रीढ़ (Merudanda) के आधार से लेकर सिर के शीर्ष तक फैले हुए हैं और जीवन के हर पहलू – शरीर, मन और आत्मा – को प्रभावित करते हैं।
यदि ये चक्र संतुलित हों तो जीवन में स्वास्थ्य, शांति और आनंद बना रहता है। परंतु इनके असंतुलित होने पर भय, क्रोध, अस्थिरता, रोग और मानसिक उलझनें बढ़ सकती हैं।
आइए, सातों चक्रों को समझें और जानें कि इन्हें कैसे सरल ध्यान और दैनिक अभ्यास से संतुलित किया जा सकता है।
1️⃣ मूलाधार चक्र (Muladhara Chakra) – स्थिरता का केंद्र
- स्थान: रीढ़ का आधार
- तत्व: पृथ्वी
- रंग: लाल
- बीज मंत्र: "लं"
- गुण: स्थिरता, सुरक्षा, आधार
संतुलन उपाय:
- नंगे पैर धरती पर चलें।
- ध्यान में लाल प्रकाश की कल्पना करें।
- “लं” मंत्र का उच्चारण करें।
🕉 5 मिनट का अभ्यास
- गहरी साँस लेते हुए रीढ़ के आधार पर ध्यान लगाएँ।
- कल्पना करें कि लाल प्रकाश धरती से जुड़ रहा है।
- 2 मिनट तक “लं” मंत्र का जप करें।
2️⃣ स्वाधिष्ठान चक्र (Swadhisthana Chakra) – रचनात्मकता का केंद्र
- स्थान: नाभि के नीचे
- तत्व: जल
- रंग: नारंगी
- बीज मंत्र: "वं"
- गुण: आनंद, रचनात्मकता, संबंध
संतुलन उपाय:
- जल तत्व से जुड़ें – नदी, स्नान, तैराकी।
- कला, संगीत और नृत्य अपनाएँ।
- “वं” मंत्र का जप करें।
🕉 5 मिनट का अभ्यास
- ध्यान नाभि के नीचे केंद्रित करें।
- नारंगी प्रकाश की कल्पना करें।
- 2–3 मिनट तक “वं” मंत्र का उच्चारण करें।
3️⃣ मणिपूर चक्र (Manipura Chakra) – शक्ति का केंद्र
- स्थान: नाभि और छाती के बीच
- तत्व: अग्नि
- रंग: पीला
- बीज मंत्र: "रं"
- गुण: आत्मविश्वास, ऊर्जा, पाचन
संतुलन उपाय:
- सूर्य स्नान और प्राणायाम करें।
- कपालभाति का अभ्यास करें।
- “रं” मंत्र का जप करें।
🕉 5 मिनट का अभ्यास
- नाभि पर ध्यान लगाएँ।
- पीले सूर्य की ज्योति की कल्पना करें।
- 2 मिनट तक “रं” मंत्र का जप करें।
4️⃣ अनाहत चक्र (Anahata Chakra) – प्रेम का केंद्र
- स्थान: हृदय का मध्य
- तत्व: वायु
- रंग: हरा
- बीज मंत्र: "यं"
- गुण: प्रेम, करुणा, संतुलन
संतुलन उपाय:
- कृतज्ञता और क्षमा का अभ्यास करें।
- वृक्षों और प्रकृति में समय बिताएँ।
- “यं” मंत्र का जप करें।
🕉 5 मिनट का अभ्यास
- हाथ जोड़कर हृदय पर रखें।
- हरे प्रकाश की कल्पना करें जो हृदय से फैल रहा है।
- 2–3 मिनट तक “यं” मंत्र का जप करें।
5️⃣ विशुद्धि चक्र (Vishuddha Chakra) – वाणी का केंद्र
- स्थान: गले का मध्य
- तत्व: आकाश
- रंग: नीला
- बीज मंत्र: "हं"
- गुण: वाणी, अभिव्यक्ति, सत्य
संतुलन उपाय:
- सत्य बोलें, मधुर वाणी अपनाएँ।
- भजन, कीर्तन और मंत्र गाएँ।
- “हं” मंत्र का उच्चारण करें।
🕉 5 मिनट का अभ्यास
- गले पर ध्यान लगाएँ।
- नीले प्रकाश की कल्पना करें।
- 2 मिनट तक “हं” मंत्र का जप करें।
6️⃣ आज्ञा चक्र (Ajna Chakra) – अंतर्ज्ञान का केंद्र
- स्थान: भृकुटि (दोनों भौंहों के बीच)
- तत्व: मन/बुद्धि
- रंग: नीला-बैंगनी (इंडिगो)
- बीज मंत्र: "ॐ" / "ं"
- गुण: अंतर्ज्ञान, विवेक, ध्यान
संतुलन उपाय:
- त्राटक ध्यान (दीपक की लौ पर दृष्टि टिकाना)।
- आत्ममंथन और चिंतन।
- “ॐ” मंत्र का जप करें।
🕉 5 मिनट का अभ्यास
- भृकुटि पर ध्यान केंद्रित करें।
- इंडिगो प्रकाश की कल्पना करें।
- 2–3 मिनट तक “ॐ” का उच्चारण करें।
7️⃣ सहस्रार चक्र (Sahasrara Chakra) – ईश्वर से एकत्व का केंद्र
- स्थान: सिर का शीर्ष (Brahmarandhra)
- तत्व: चेतना
- रंग: श्वेत या बैंगनी
- मंत्र: मौन / “ॐ”
- गुण: ब्रह्मज्ञान, आध्यात्मिकता
संतुलन उपाय:
- मौन साधना और ध्यान।
- “मैं और ईश्वर एक हूँ” भाव का चिंतन।
- श्वेत प्रकाश की कल्पना।
🕉 5 मिनट का अभ्यास
- सिर के शीर्ष पर ध्यान लगाएँ।
- ऊपर से श्वेत प्रकाश उतरता हुआ देखें।
- 3 मिनट मौन रहें या “ॐ” जपें।
✨ सारांश
सात चक्र केवल योग-दर्शन का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन का संतुलन हैं।
- नीचे के चक्र हमें भौतिक जीवन और स्थिरता से जोड़ते हैं।
- मध्य के चक्र भावना और संबंधों को संतुलित करते हैं।
- ऊपरी चक्र हमें ज्ञान और ईश्वर की ओर ले जाते हैं।
सिर्फ़ 5-5 मिनट के अभ्यास से धीरे-धीरे मन और शरीर में हल्कापन, स्थिरता और प्रसन्नता आने लगती है। यह कोई तात्कालिक जादू नहीं, बल्कि एक सतत साधना है।
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