🌸 "दान ही प्राप्ति का द्वार" 🌸
🌸 "दान ही प्राप्ति का द्वार" 🌸 एक बार परमपूज्य गुरुदेव अपने शिष्यों को जीवन का रहस्य समझा रहे थे। मधुर वाणी में उन्होंने कहा— > “मनुष्य का जन्म से मृत्युपर्यंत का जीवन साँप-सीढ़ी के खेल के समान है— कभी ऊँचाई की सीढ़ियाँ मिलती हैं, तो कभी परिस्थितियों के साँप हमें नीचे गिरा देते हैं। किंतु खेल में हार-जीत का भाव ही जीवन के सुख-दुःख का कारण बनता है।” उन्होंने दृष्टान्त सुनाया— एक नन्हा भाई और बड़ी बहन साँप-सीढ़ी का खेल खेल रहे थे। भाई हारने पर रो पड़ता, पर बहन हारने पर भी हँस देती। गुरुदेव बोले— “यह समझने योग्य है कि जीवन में जो स्थितियाँ हमारे वश में नहीं हैं, उन्हें प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार करना ही शांति का मार्ग है। अन्यथा, अनिच्छा से भी तो उन्हें सहना ही पड़ेगा। इस खेल में तुम्हारे हाथ में केवल पासा फेंकना है— सीढ़ी मिले या साँप, यह तुम्हारे वश में नहीं। इसी प्रकार, जीवन में कर्म तो तुम्हारे हैं, परिणाम नहीं। स्वीकार करने की यह सामर्थ्य आती है— मन, बुद्धि और संस्कार पर विजय पाकर, और यह विजय प्राप्त होती है— जप एवं ध्यान की साधना से। इसलिए मैं कहता हूँ— मैं पथ प्रदर्शित ...