✍️स्वस्थ जीवन का रहस्य – प्रसन्न रहने की कला🌺
🌿 प्रसन्नता ही स्वास्थ्य की कुंजी : मन, शरीर और आत्मा का संतुलन 🧠 मन और शरीर का गहरा संबंध मनुष्य का जीवन केवल शरीर तक सीमित नहीं है। विचार, भावनाएँ और चेतना शरीर को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं। नकारात्मक भावनाएँ (भय, क्रोध, ईर्ष्या, चिंता) → शरीर में तनाव हार्मोन उत्पन्न करती हैं, जो हृदय, पाचन और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को नुकसान पहुँचाते हैं। सकारात्मक भावनाएँ (प्रेम, दया, संतोष, प्रसन्नता) → हैप्पी हार्मोन (सेरोटोनिन, एंडॉर्फिन) उत्पन्न करते हैं, जो शरीर को स्वस्थ और मन को शांत रखते हैं। शास्त्रीय दृष्टिकोण 👉 “मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः।” (अमृतबिन्दु उपनिषद् 2) अर्थात् मनुष्य का मन ही बंधन और मुक्ति का कारण है। 👉 “सर्वं दुःखं विवर्जय्य सर्वसुखमवाप्नुयात्।” (मनुस्मृति 4/160) अर्थात् दुःखदायी विचारों को त्यागने वाला ही सच्चे सुख को प्राप्त करता है। 📖 विज्ञान भी यही कहता है प्रोफेसर एल. मर्गेट के वैज्ञानिक प्रयोग बताते हैं कि – नकारात्मक विचारों से पसीना, थूक, श्वास और रक्त में जहरीले तत्व उत्पन्न होते हैं। सकारात्मक विचारों से स्वास्थ्य-वर्धक तत्व और ऊर्जा पैदा होती...